मन से भगवान का सुमिरन करने से मिट जाता है जीवन का कष्ट
सलेमपुर। देवरिया जिले के सलाहाबाद में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही।
कथा वाचक अनुराधा तिवारी ने बताया कि भागवत कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरि से मिलने का मार्ग प्रशस्त करती है।
बोली कलयुग में मनुष्य के पुण्य तो सिद्ध होते हैं। लेकिन मानस सिद्धि के लिए ईश्वर का मन से स्मरण आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि नंदलाल के पैदा होने की खुशी में नंद बाबा के यहां उत्सव शुरू हुआ। बधाई देने वालों का तांता लग गया।
लेकिन जब कंस को जब पता चला कि देवकी के आठवां बच्चा पैदा हो गया है। उन्होंने बच्ची को मारने की जब कोशिश की। वह योगमाया का रूप लेकर आकाश में चली गई। वहां उन्होंने भविष्यवाणी की कि तेरे मारने वाला तो गोकुल में पैदा हो चुका है।
उसके बाद कंस भगवान कृष्ण को मौत के घाट उतारने के लिए राक्षसों की फौज भेज दी। सबसे बलशाली राक्षसी पूतना को भगवान श्रीकृष्ण ने मौत के घाट उतार दिया। पूतना भगवान श्रीकृष्ण को भेष बदलकर अपने स्तन के जहरीले दूध को पिलाना चाहती थी।लेकिन भगवान ने उसको पहचान लिया था।
कथा वाचक अनुराधा तिवारी ने यशोदा मां के साथ बालपन की शरारतें, भगवान श्रीकृष्ण का गो प्रेम, कालिया नाग मान मर्दन, माखन चोरी गोपियों का प्रसंग सहित अन्य कई प्रसंगों का वर्णन किया।
उक्त अवसर पर रामतपस्या, अखिलेश, ललिता देवी, अजय वत्स, अयोध्यालाल बीके तिवारी आदि लोग मौजूद रहे।